आज हम एक ऐसे दौर में जी रहे हैं, जहाँ इंटरनेट केवल मनोरंजन या सोशल मीडिया का साधन नहीं रह गया है, बल्कि यह शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, व्यवसाय और शासन से जुड़ी हर गतिविधि का आधार बन चुका है। शहरों में तो इंटरनेट लंबे समय से सुलभ है, लेकिन असली चुनौती इसे गांव-गांव पहुँचाने की रही है।
भारत की 65% से अधिक आबादी ग्रामीण क्षेत्रों में रहती है। इन इलाकों में इंटरनेट कनेक्टिविटी की कमी ने विकास की गति को धीमा कर रखा था। लेकिन अब सरकार ने इस दिशा में ठोस कदम उठाते हुए नई डिजिटलीकरण योजना शुरू की है। इस योजना का उद्देश्य सिर्फ इंटरनेट पहुँचाना ही नहीं, बल्कि ग्रामीण भारत को डिजिटल रूप से सशक्त बनाना भी है।
सरकार की डिजिटलीकरण योजना का परिचय
भारत नेट (BharatNet) परियोजना क्या है?
गांव-गांव इंटरनेट पहुँचाने के लिए सरकार ने भारत नेट (BharatNet) नामक एक महत्वाकांक्षी योजना शुरू की है। यह दुनिया की सबसे बड़ी ग्रामीण ब्रॉडबैंड परियोजना मानी जाती है। इसका मुख्य उद्देश्य है—देश के सभी ग्राम पंचायतों को ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क से जोड़ना।
इस योजना की शुरुआत वर्ष 2011 में हुई थी, लेकिन इसे गति और व्यापक रूप से लागू करने का काम डिजिटल इंडिया अभियान (2015) के बाद तेज़ हुआ। भारत नेट के अंतर्गत देश की 2.5 लाख से अधिक ग्राम पंचायतों तक उच्च गति का इंटरनेट पहुँचाने का लक्ष्य रखा गया है।
डिजिटल इंडिया अभियान से जुड़ाव
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2015 में “डिजिटल इंडिया” अभियान की शुरुआत की थी। इसका उद्देश्य था—हर नागरिक को सरकारी सेवाओं तक ऑनलाइन पहुँच दिलाना, डिजिटल साक्षरता बढ़ाना और आर्थिक गतिविधियों को तकनीक के माध्यम से सरल बनाना।
भारत नेट परियोजना इसी अभियान का अहम हिस्सा है। इसके माध्यम से न केवल इंटरनेट पहुँचेगा बल्कि ग्रामीण नागरिकों को शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि संबंधी जानकारी और रोजगार के नए अवसर भी डिजिटल माध्यम से मिलेंगे।
इस योजना के प्रमुख उद्देश्य
इस नई डिजिटलीकरण योजना के तहत सरकार ने कुछ प्रमुख लक्ष्य निर्धारित किए हैं—
- सभी ग्राम पंचायतों को ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी से जोड़ना।
- ग्रामीण नागरिकों को सस्ती और तेज़ इंटरनेट सेवा उपलब्ध कराना।
- शिक्षा, स्वास्थ्य और कृषि में डिजिटल सेवाओं का विस्तार करना।
- डिजिटल साक्षरता को बढ़ावा देना।
- ग्रामीण अर्थव्यवस्था को आत्मनिर्भर बनाना।
इस प्रकार यह योजना केवल तकनीकी विकास तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सामाजिक और आर्थिक विकास का भी आधार है।
गांव-गांव इंटरनेट पहुँचाने की प्रक्रिया
ऑप्टिकल फाइबर बिछाने की तकनीक
गांवों तक इंटरनेट पहुँचाने के लिए सबसे अहम काम है ऑप्टिकल फाइबर केबल बिछाना। ये फाइबर केबल पारंपरिक तांबे की तारों की तुलना में कहीं अधिक तेज़ और स्थिर इंटरनेट कनेक्शन उपलब्ध कराते हैं। सरकार ने “भारत ब्रॉडबैंड नेटवर्क लिमिटेड (BBNL)” और विभिन्न राज्य एजेंसियों की मदद से देशभर में लाखों किलोमीटर फाइबर केबल बिछाने का काम शुरू किया है।
ग्राम पंचायत स्तर पर इंटरनेट कनेक्टिविटी
योजना के अंतर्गत हर ग्राम पंचायत को एक डिजिटल हब बनाया जा रहा है। यहां एक ऑप्टिकल नेटवर्क टर्मिनल (ONT) स्थापित किया जाता है, जिससे गांव के स्कूल, अस्पताल, पंचायत भवन और कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) को इंटरनेट से जोड़ा जा सके। बाद में इन्हीं केंद्रों से वाई-फाई या अन्य माध्यमों से आम नागरिकों को भी इंटरनेट सुविधा दी जाती है।

निजी कंपनियों और सरकार की साझेदारी
सरकार अकेले इस बड़े मिशन को पूरा नहीं कर सकती थी। इसलिए कई निजी कंपनियों, जैसे कि भारती एयरटेल, रिलायंस जियो, वोडाफोन-आइडिया आदि को भी इसमें जोड़ा गया है। इन्हें ग्राम पंचायतों के नेटवर्क का उपयोग करके इंटरनेट सेवाएँ देने की अनुमति है। इस तरह पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल अपनाया गया है, जिससे परियोजना को गति मिली है।
इसके अलावा, कुछ राज्यों में सरकार ने स्थानीय कंपनियों और केबल ऑपरेटरों को भी शामिल किया है ताकि इंटरनेट का विस्तार तेजी से हो सके।
ग्रामीण जीवन में इंटरनेट का प्रभाव
गांवों में इंटरनेट पहुँचने का असर केवल तकनीकी स्तर तक सीमित नहीं है, बल्कि यह लोगों के दैनिक जीवन और सामाजिक ढांचे में भी बदलाव ला रहा है। आइए देखें, किन-किन क्षेत्रों में इसका गहरा प्रभाव पड़ा है—
1. शिक्षा पर असर
ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा लंबे समय से संसाधनों की कमी से जूझती रही है। अच्छे शिक्षक, पुस्तकालय और आधुनिक पाठ्य सामग्री की अनुपलब्धता छात्रों को शहरों की तुलना में पीछे रखती थी।
- अब इंटरनेट के माध्यम से छात्र ऑनलाइन क्लासेस, डिजिटल लाइब्रेरी और ई-लर्निंग प्लेटफॉर्म तक पहुँच पा रहे हैं।
- सरकार द्वारा DIKSHA पोर्टल और SWAYAM जैसी ई-लर्निंग सेवाएँ उपलब्ध कराई गई हैं।
- इससे बच्चों के साथ-साथ युवाओं को भी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी और कौशल विकास में मदद मिल रही है।
2. कृषि और किसानों को लाभ
भारत की अर्थव्यवस्था का बड़ा हिस्सा कृषि पर निर्भर है, और किसानों के लिए सही समय पर जानकारी मिलना बेहद ज़रूरी है। इंटरनेट ने इसमें अहम भूमिका निभाई है।
- किसान अब मौसम की ताज़ा जानकारी, फसल बीमा, सरकारी योजनाओं और मंडी भावों की जानकारी मोबाइल पर पा सकते हैं।
- ई-नाम (e-NAM) पोर्टल के माध्यम से किसान अपनी उपज को सीधे डिजिटल प्लेटफॉर्म पर बेच सकते हैं।
- इससे बिचौलियों पर निर्भरता कम होती है और किसानों की आय में वृद्धि होती है।
3. स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार
गांवों में डॉक्टरों और अस्पतालों की कमी लंबे समय से एक चुनौती रही है। इंटरनेट ने इसे कुछ हद तक आसान बना दिया है।
- टेलीमेडिसिन सेवाओं की मदद से ग्रामीण मरीज बड़े शहरों के डॉक्टरों से ऑनलाइन परामर्श ले सकते हैं।
- स्वास्थ्य से जुड़ी ऐप्स और सरकारी वेबसाइटें लोगों को दवा, टीकाकरण और स्वास्थ्य योजनाओं की जानकारी देती हैं।
- कोविड-19 महामारी के दौरान इंटरनेट की वजह से आरोग्य सेतु ऐप और वैक्सीन बुकिंग जैसी सेवाएँ गांवों तक पहुँच पाईं।
4. रोजगार और छोटे व्यवसाय में योगदान
इंटरनेट ने ग्रामीण युवाओं को नए रोजगार के अवसर दिए हैं।
- फ्रीलांसिंग, ऑनलाइन काम और ई-कॉमर्स जैसी संभावनाएँ अब गांवों से भी संभव हो गई हैं।
- महिलाएँ ऑनलाइन हस्तशिल्प और घरेलू उत्पाद बेचकर आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन रही हैं।
- कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) ग्रामीण उद्यमिता को बढ़ावा देने का माध्यम बन चुके हैं।
कुल मिलाकर, इंटरनेट ने ग्रामीण जीवन में शिक्षा, कृषि, स्वास्थ्य और रोजगार जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों को नई दिशा दी है।
चुनौतियाँ और बाधाएँ
गांवों में इंटरनेट पहुँचाना जितना महत्वपूर्ण है, उतना ही कठिन भी। सरकार और निजी कंपनियों की कोशिशों के बावजूद कई बड़ी चुनौतियाँ सामने आती हैं। आइए इन्हें विस्तार से समझते हैं—
1. तकनीकी समस्याएँ
- कई गांव दूरदराज और भौगोलिक रूप से कठिन इलाकों में बसे हैं, जहाँ ऑप्टिकल फाइबर बिछाना आसान नहीं है।
- नेटवर्क उपकरणों का रख-रखाव भी एक बड़ी समस्या है क्योंकि गांवों में तकनीकी विशेषज्ञों की कमी होती है।
2. बिजली और बुनियादी ढाँचे की कमी
- इंटरनेट सेवाएँ चालू रखने के लिए बिजली की नियमित आपूर्ति ज़रूरी है, लेकिन कई गांवों में अब भी बिजली कटौती आम है।
- इंटरनेट से जुड़े उपकरण, जैसे राउटर और सर्वर, लगातार बिजली पर निर्भर होते हैं। इससे सेवाएँ बाधित हो जाती हैं।
3. डिजिटल साक्षरता की चुनौती
- इंटरनेट पहुँचने के बावजूद कई लोग इसका सही उपयोग नहीं कर पाते।
- बुजुर्गों और महिलाओं में डिजिटल उपकरणों के उपयोग की जानकारी कम होती है।
- कई बार लोग ठगी और साइबर अपराध का शिकार हो जाते हैं क्योंकि उन्हें ऑनलाइन सुरक्षा का ज्ञान नहीं होता।
4. लागत और आर्थिक समस्याएँ
- गरीब परिवारों के लिए स्मार्टफोन और डेटा पैक खरीदना अब भी बोझिल साबित होता है।
- इंटरनेट तो उपलब्ध है, लेकिन सभी इसे वहन करने में सक्षम नहीं हैं।
5. भाषा और सामग्री की कमी
- इंटरनेट पर उपलब्ध अधिकांश सामग्री अंग्रेज़ी या शहरी हिंदी में है।
- ग्रामीण भाषाओं और स्थानीय बोलियों में डिजिटल सामग्री की कमी से लोग इंटरनेट का पूरा लाभ नहीं उठा पाते।
इन चुनौतियों के कारण इंटरनेट का पूर्ण लाभ गांवों तक नहीं पहुँच पाता, लेकिन सरकार लगातार इन बाधाओं को दूर करने की कोशिश कर रही है।
सरकार द्वारा उठाए गए कदम
गांवों में इंटरनेट पहुँचाने और उससे जुड़ी चुनौतियों को कम करने के लिए सरकार ने कई ठोस कदम उठाए हैं। ये प्रयास न केवल तकनीकी स्तर पर बल्कि सामाजिक और आर्थिक स्तर पर भी किए जा रहे हैं।
1. डिजिटल प्रशिक्षण केंद्र
सरकार ने डिजिटल साक्षरता अभियान (Digital Saksharta Abhiyan – DISHA) और प्रधानमंत्री ग्रामीण डिजिटल साक्षरता अभियान (PMGDISHA) शुरू किए हैं।
- इनके माध्यम से ग्रामीण नागरिकों को मोबाइल, कंप्यूटर और इंटरनेट के उपयोग की ट्रेनिंग दी जाती है।
- महिलाओं, किसानों और युवाओं को प्राथमिकता देकर उन्हें डिजिटल रूप से आत्मनिर्भर बनाने की कोशिश की जा रही है।
2. जनसेवा केंद्र (Common Service Centres – CSCs)
ग्रामीण इलाकों में कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) इंटरनेट से जुड़े कई काम आसान बना रहे हैं।
- यहां लोग आधार कार्ड, राशन कार्ड, पेंशन, बैंकिंग और बीमा सेवाओं का लाभ उठा सकते हैं।
- CSCs ग्रामीण उद्यमिता को बढ़ावा देते हैं क्योंकि इन्हें स्थानीय स्तर पर उद्यमी चलाते हैं।
- ये केंद्र गांवों में ई-गवर्नेंस का सबसे बड़ा साधन बन चुके हैं।
3. सब्सिडी और आर्थिक सहायता
- सरकार ग्रामीण इलाकों में इंटरनेट सेवाओं को सस्ता और सुलभ बनाने के लिए निजी कंपनियों को सब्सिडी देती है।
- कई योजनाओं के तहत गरीब परिवारों को स्मार्टफोन खरीदने या डिजिटल सेवाओं का उपयोग करने के लिए आर्थिक मदद मिलती है।
4. भाषा और सामग्री विकास
- सरकार ने यह भी सुनिश्चित किया है कि इंटरनेट पर स्थानीय भाषाओं में अधिक से अधिक सामग्री उपलब्ध कराई जाए।
- भाषा अनुवाद ऐप्स और क्षेत्रीय ई-पोर्टल्स विकसित किए गए हैं ताकि ग्रामीण नागरिक आसानी से जानकारी तक पहुँच सकें।
5. आधार और डिजिटल भुगतान को बढ़ावा
- ग्रामीण क्षेत्रों में आधार आधारित भुगतान प्रणाली (AePS) और भीम UPI ऐप को प्रोत्साहित किया गया है।
- इससे बिना बैंक शाखा में जाए ग्रामीण नागरिक सीधे मोबाइल से लेन-देन कर सकते हैं।
इन कदमों से यह साफ है कि सरकार सिर्फ इंटरनेट उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्रामीण जनता को डिजिटल उपयोगकर्ता और भागीदार बनाने की दिशा में भी काम कर रही है।
सरकार द्वारा उठाए गए कदम
गांवों में इंटरनेट पहुँचाने और उससे जुड़ी चुनौतियों को कम करने के लिए सरकार ने कई ठोस कदम उठाए हैं। ये प्रयास न केवल तकनीकी स्तर पर बल्कि सामाजिक और आर्थिक स्तर पर भी किए जा रहे हैं।
1. डिजिटल प्रशिक्षण केंद्र
सरकार ने डिजिटल साक्षरता अभियान (Digital Saksharta Abhiyan – DISHA) और प्रधानमंत्री ग्रामीण डिजिटल साक्षरता अभियान (PMGDISHA) शुरू किए हैं।
- इनके माध्यम से ग्रामीण नागरिकों को मोबाइल, कंप्यूटर और इंटरनेट के उपयोग की ट्रेनिंग दी जाती है।
- महिलाओं, किसानों और युवाओं को प्राथमिकता देकर उन्हें डिजिटल रूप से आत्मनिर्भर बनाने की कोशिश की जा रही है।
2. जनसेवा केंद्र (Common Service Centres – CSCs)
ग्रामीण इलाकों में कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) इंटरनेट से जुड़े कई काम आसान बना रहे हैं।
- यहां लोग आधार कार्ड, राशन कार्ड, पेंशन, बैंकिंग और बीमा सेवाओं का लाभ उठा सकते हैं।
- CSCs ग्रामीण उद्यमिता को बढ़ावा देते हैं क्योंकि इन्हें स्थानीय स्तर पर उद्यमी चलाते हैं।
- ये केंद्र गांवों में ई-गवर्नेंस का सबसे बड़ा साधन बन चुके हैं।
3. सब्सिडी और आर्थिक सहायता
- सरकार ग्रामीण इलाकों में इंटरनेट सेवाओं को सस्ता और सुलभ बनाने के लिए निजी कंपनियों को सब्सिडी देती है।
- कई योजनाओं के तहत गरीब परिवारों को स्मार्टफोन खरीदने या डिजिटल सेवाओं का उपयोग करने के लिए आर्थिक मदद मिलती है।
4. भाषा और सामग्री विकास
- सरकार ने यह भी सुनिश्चित किया है कि इंटरनेट पर स्थानीय भाषाओं में अधिक से अधिक सामग्री उपलब्ध कराई जाए।
- भाषा अनुवाद ऐप्स और क्षेत्रीय ई-पोर्टल्स विकसित किए गए हैं ताकि ग्रामीण नागरिक आसानी से जानकारी तक पहुँच सकें।
5. आधार और डिजिटल भुगतान को बढ़ावा
- ग्रामीण क्षेत्रों में आधार आधारित भुगतान प्रणाली (AePS) और भीम UPI ऐप को प्रोत्साहित किया गया है।
- इससे बिना बैंक शाखा में जाए ग्रामीण नागरिक सीधे मोबाइल से लेन-देन कर सकते हैं।
इन कदमों से यह साफ है कि सरकार सिर्फ इंटरनेट उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्रामीण जनता को डिजिटल उपयोगकर्ता और भागीदार बनाने की दिशा में भी काम कर रही है।
भविष्य की संभावनाएँ
गांवों में इंटरनेट पहुँचाना केवल वर्तमान की जरूरत नहीं, बल्कि भविष्य की दिशा भी तय करता है। डिजिटलीकरण योजनाएँ ग्रामीण भारत को नई संभावनाओं की ओर ले जा रही हैं।
1. 5G और ग्रामीण क्षेत्र
भारत में 5G तकनीक शुरू हो चुकी है। आने वाले समय में इसका विस्तार गांवों तक होगा।
- 5G से अल्ट्रा-फास्ट इंटरनेट स्पीड मिलेगी, जिससे शिक्षा, स्वास्थ्य और कृषि सेवाओं में नई क्रांति आ सकती है।
- किसान IoT (Internet of Things) आधारित स्मार्ट उपकरणों का उपयोग करके सिंचाई और खेती को अधिक आधुनिक बना पाएंगे।
- टेलीमेडिसिन और ऑनलाइन शिक्षा सेवाएँ और भी प्रभावी हो जाएँगी।
2. स्मार्ट विलेज की दिशा में कदम
जैसे शहरों को “स्मार्ट सिटी” के रूप में विकसित किया जा रहा है, उसी तरह अब “स्मार्ट विलेज” की अवधारणा भी सामने आ रही है।
- स्मार्ट विलेज में इंटरनेट आधारित सुविधाएँ, जैसे स्मार्ट क्लासरूम, डिजिटल हेल्थ सेंटर और ई-गवर्नेंस उपलब्ध होंगी।
- गांवों की पंचायतें ऑनलाइन बैठकें कर सकेंगी और लोग घर बैठे सरकारी योजनाओं का लाभ उठा पाएँगे।
3. आत्मनिर्भर ग्रामीण भारत का सपना
इंटरनेट की मदद से ग्रामीण क्षेत्रों में स्टार्टअप्स और छोटे उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा।
- ग्रामीण युवा अपने उत्पादों और सेवाओं को सीधे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर बेच सकेंगे।
- इससे शहरों पर निर्भरता कम होगी और गांव भी आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनेंगे।
- महिलाओं और युवाओं के लिए रोजगार और उद्यमिता के नए अवसर खुलेंगे।
4. सामाजिक और सांस्कृतिक बदलाव
भविष्य में इंटरनेट से गांवों में सामाजिक जुड़ाव और जागरूकता भी बढ़ेगी।
- लोग राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आसानी से जुड़ सकेंगे।
- नई पीढ़ी तकनीक का बेहतर उपयोग करके गांवों की पारंपरिक कला, संस्कृति और हस्तशिल्प को वैश्विक मंच पर पहुँचा सकेगी।
कुल मिलाकर, आने वाले वर्षों में इंटरनेट ग्रामीण भारत को न सिर्फ डिजिटल बल्कि आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक रूप से भी मजबूत बनाएगा।
निष्कर्ष
गांवों में इंटरनेट पहुँचाने की सरकारी योजना केवल तकनीकी पहल नहीं है, बल्कि यह भारत की सामाजिक और आर्थिक प्रगति की नींव है। भारत नेट और डिजिटल इंडिया जैसे अभियानों ने यह साबित कर दिया है कि अगर सही नीति और दूरदर्शिता के साथ काम किया जाए, तो देश के सबसे दूरस्थ गांव भी डिजिटल क्रांति का हिस्सा बन सकते हैं।
इंटरनेट ने ग्रामीण जीवन में शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि और रोजगार के नए द्वार खोल दिए हैं। बच्चों को ऑनलाइन शिक्षा मिल रही है, किसान सही जानकारी और उचित दाम पा रहे हैं, मरीज डॉक्टर से ऑनलाइन परामर्श ले रहे हैं और युवा रोजगार के नए अवसर तलाश रहे हैं।
हालाँकि चुनौतियाँ अभी भी मौजूद हैं—जैसे बिजली की कमी, तकनीकी बाधाएँ और डिजिटल साक्षरता का अभाव। लेकिन सरकार ने प्रशिक्षण कार्यक्रमों, कॉमन सर्विस सेंटरों और स्थानीय भाषाओं में सामग्री उपलब्ध कराकर इन बाधाओं को धीरे-धीरे दूर करना शुरू कर दिया है।
भविष्य में 5G तकनीक, स्मार्ट विलेज और डिजिटल स्टार्टअप्स ग्रामीण भारत को आत्मनिर्भर और आधुनिक बनाने में मदद करेंगे। इससे न केवल ग्रामीण नागरिकों का जीवन आसान होगा, बल्कि पूरा देश “डिजिटल भारत” की दिशा में तेजी से आगे बढ़ेगा।
संक्षेप में कहा जाए तो, यह योजना गांवों के लिए सिर्फ इंटरनेट की सुविधा नहीं है, बल्कि यह नई संभावनाओं, अवसरों और विकास का रास्ता है। यह भारत को शहर से गांव तक डिजिटल रूप से एकजुट करने का एक बड़ा कदम है।